Iहेलो दोस्तो कैसे हो आप सब आज मैं आपको समास और उसके प्रकारो के बारे में जानकारी दूँगा आशा करता हुँ आपको जरुर पसंद आएगी
दोस्तो समास दो शब्दो से मिलकर बना होता हैं - सम+ आस
सम का अर्थ हैं पास और आस का अर्थ हैं बैठना इस प्रकार समास अर्थ हैं पास पास बैठना
समास के उपनाम - सनक्षिप्तीकरण
पहले पद को - पूर्व पद
वा दूसरे पद को उत्तर पद कहते हैं
दोनो पदो से मिलकर बने शब्द को समासिक पद कहते हैं
जैसे - राजपुत्र
पहला पद या पूर्व पद - राज
दूसरा पद या उत्तर पद - पुत्र
समासिक पद- राजपुत्र
समास के प्रकार - दोस्तो समास 6 प्रकार के होते हैं
समास के प्रकारो कि ट्रिक -
अब के तो दे दे
अ = अव्यीभाव
ब = बहुबिर्ही
क = कर्मधारय
तो = ततपुरुष
दे = दिगु
दे = दुन्द
1. अव्यीभाव समास - 1.जिस समास का पहला पद अव्यय होता हैं वहा अव्यीभाव समास होता हैं
2. जिस समास पहला पद प्रधान होता हैं
3. जिस समास में शब्दो कि पुनराविर्ती होती हैं वहाँ अव्ययीभाव समास होता हैं
4. जिस समास में उपसर्ग का प्रयोग होता हैं दोस्तो वहा भी अव्यीभाव समास होता हैं
उदारण - यथाशक्ति- शक्ति के अनुसार
यथागति- गति के अनुसार
यथासंभव- जितना संभव हो सके
प्रतिदिन- प्रत्येक दिन
प्रतिपल- प्रत्येक पल
प्रतिक्षण- प्रत्येक क्षण
रातोरात- रात ही रात में
हाथोहाथ- हाथ ही हाथ में
प्रत्येक- हर एक
लूटमलूट- लूट के बाद लूट
आमरण- मरण तक
आकंठ - कंठ तक...
आजन्म - जन्म तक आदि
2. बहुबीर्ही समास-
जिस समास का कोई भी पद प्रधान नही होता व एक अन्य अर्थ की ओर संकेत किया जाता हैं वहाँ बहुवीर्ही समास होता हैं
जैसे - लम्बोदर = लंबा हैं उदर जिसका = गणेश जी
पितम्बर - पीत(पीले) हैं अंबर( वस्त्र) जिसके = विश्नू जी
पंचमुखी- पांच हैं मुख जिसके = हनुमान जी
एकदन्त - एक हैं दाँत जिनका = गणेश जी
आशुतोष - शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं जो - भगवान शिव
नीलकंठ - नीला हैं कंठ जिनका - शिव
गिरधर - वह जिन्होने गिरी को धारण किया - कृष्णा
पुष्पधन्वा - पुष्पो का हैं धनुष जिनका - कामदेव
चतुर्भुज - चार हैं भुजायें जिनकी - विश्नू जी
चन्द्रमौली - वह जिनके मौली ( मस्तक) पर चन्द्र हैं = शिवजी
कपीशर - कपियों( बंदरो) का हैं जो ईशवर
त्रिनेत्र - तीन हैं नेत्र जिसके - शिव जी
चक्रधर- चक्र को धारण करने वाला जो - कृष्णा आदि
मुरारी - मुर का अरी हैं जो - कृष्णा
षडानन - 6 है आनन जिसके - कार्तीके
दशानन - दस हैं आनन ( सिर) जिसके - रावण... आदि
3.कर्मधारय समास-
इस समास का दूसरा पद प्रधान होता हैं, इसमे पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेषय होता हैं या पहला पद उपमान और दूसरा पद उपमेय होता हैं
विशेषण- जो विशेषता बताई जाए उसे विशेषण कहतें हैं
विशेषय- जिसकी विशेषता बताई जाए उसे विशेषय कहते हैं
जैसे - नीला घोडा
नीला = विशेषण
घोडा= विशेषय
जैसे - नीलाम्बर = नीला हैं जो अंबर
कालीमिर्च - काली हैं जो मिर्च
महात्मा - महान हैं जो आत्मा
शिष्टाचार - शिष्ट हैं जो आचार
विध्याधन - विध्या रूपी धन
महापुरुष - महान हैं जो पुरुष
शुभाग्मन - शुभ हैं जो आगमन
अंधकूप - अंधा हैं जो कूप
दुशचरित्र - बुरा हैं जो चरित्र
चरणकमल -कमल रूपी चरण
महाजन - महान है जो जन
लालटोपी- लाल है जो टोपी.... आदि
दिगु समास-
जिस समास का पहला पद संख्यावाची होता हैं व दूसरा पद प्रधान होता हैं उसे दिगु समास कहते हैं
जैसे -त्रिलोक - तीन लोको का समाहार
चौमासा- चार मासो का समाहार
दोपहर - दो पहरो का समाहार
त्रिभुवन - तीन भुवनो का समूह
नवग्रह - नौ ग्रहो का समूह....आदि
5. दौन्द समास-
1.जिस समास के दोनो पद प्रधान व एक दूसरे के पूरक होते हैं उसे दौन्द समास कहते हैं
2. जिस समास में उपसर्गो का प्रयोग होता हैं उसे दौन्द समास कहते हैं
3.जिस समास में योजक चिन्ह का प्रयोग होता हैं वहाँ भी दुन्द समास होता हैं
जैसे - माता-पिता = माता और पिता
भाई- बाहिन = भाई और बाहिन
पति-पत्नि = पति और पत्नि
जन्म- मरण-जन्म या मरण
पेड़-पौधे = पेड़-पौधे आदि
चाचा-चाची = चाचा और चाची
सुख- दुख- सुख या दुख
राधा-कृष्णा = राधा और कृष्णा
धन- दौलत = धन दौलत आदि
नर - नारी = नर और नारी
गौरीशंकर = गौरी और शंकर
कपडा - लत्ता = कपडा - लत्ता आदि
दूध -रोटी = दूध और रोटी
कुर्ता- टोपी = कुर्ता और टोपी ....आदि
6.तत्पुरुष समास- जिस समास का पहला पद गौण व दूसरा पद प्रधान होता हैं उसे तत्पुरुष समास कहते हैं
2. इसमे दूसरा पद विशेषय होता हैं व प्रथम पद उसकी विशेषता बताता हैं जैसे - राजपुत्र = राजा का पुत्र इसमे कर्ता व सम्बोदन कारक कि विभक्ति चिन्हो को छोड़कर 6 विभक्तियो का प्रयोग होता हैं
1.कर्म तत्पुरुष समास(को)-
जैसे- यशप्राप्त = यश को प्राप्त
चिडीमार = चिडिया को मारने वाला
वनगमन = वन को गमन
कमरतोड = कमर को तोड़ने वाला
शरणागत = शरण को आगत
2. करण तत्पुरुष- (से/के दुआरा)
जैसे-शोकाकुल = शोक से आकुल
हस्तलिखित = हस्त से लिखित
रेलयात्रा = रेल के दुआरा यात्रा
तुलसीकृत = तुलसी दुआरा कृत
गुणयुक्त = गुणो से युक्त
3.सम्प्रदान तत्पुरुष- (के लिए)
विधालय= विध्या के लिए आलय
हवन सामिग्री= हवन के लिए समिग्री
न्यायालय = न्याय के लिए आलय
मालगोदाम = माल के लिए गोदाम
शपथपत्र = शपथ के लिए पत्र
4.अपादान तत्पुरुष- (से अलग)
जैसे- नेत्रहीन= नेत्र से हीन
जन्मरोगी= जन्म से रोगी
शोभाहीन = शोभा से हीन
पदमुक्त- पद से मुक्त
5.संबंध तत्पुरुष-(का/की/के)
जैसे -सेनापति= सेना का पति
रघुवंश= रघु का वंश
गंगाजल= गंगा का जल
कन्यादान= कन्या का दान
रामचरित्र= राम का चरित्र
6.अधिकरण तत्पुरुष-( में/पर)
जैसे - कविराज= कवियो में राज
सिरदर्द= सिर में दर्द
आपबिती= आप पर बिती
नाराधम = नरो में अधम
आशा करता हूँ आपको हमारा ये लेख जरुर पसंद आएगा अगर आपके पास हमारे लिए कोई सुझाव हैं तो आप हमे Nagarajeetnagar@gmail.com पर मेल कर सकते हैं अगर आपके पास कोई लेख हैं तो आप हमे भेज सकते हैं हम उसे आपके नाम के साथ नया सवेरा पे पब्लिश करेंगे धन्यवाद

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