कैसे बने हनुमान पंचमुखी

दोस्तो आज के दिन इस धरती पर राम भक्त श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था आप सबको हनुमान जयंती की बहुत बहुत शुभकामनायें आज मैं आप लोगो को बताउँगा की हनुमान जी पंचमुखी कैसे बने
          कैसे बने हनुमान पंचमुखी

ये उस समय की बात है जब भगवान श्री राम और रावण की सेनाओ के बीच प्रबल युद्ध हो रहा था और रावण को यह पता चल गया की अब उसकी (रावण) की हार निशचित हैं तो उसने अपने एक भाई अहिरावन को बुलाया, अहिरावन मा भवानी का परम भक्त था और इसके साथ वह तंत्र-मंत्र की विध्या में भी पारंगगत था 
अहिरावन ने अपनी तंत्र विध्या से राम की पूरी सेना को गहरी नींद में सुला दिया और श्री राम और लक्ष्मण जी को बन्दी बना लिया और उन्हे पाताल लोक ले गया
जब विभीषण को इस बात का पता चला तो वह समझ गए की ये काम अहिरावन का हैं तब विभीषण ने श्री हनुमान जी को सारी बात बताई और उन्हे राम और लक्ष्मण की साहयता के लिए पाताल लोक भेजा, जब हनुमान जी पाताल लोक गये तो उन्हे उनके पुत्र मकरध्वज ने दरवाजे पर रोका तब हमुमान जी ने मकरध्व्ज को युद्ध हराया और भीतर जाकर देखा तो पांच दीपक अलग अलग दिशाओ में जल रहे थे जो की अहिरावन ने मा भवानी के लिए जलाए थे
विभीषण ने कहा था कि अगर वे उन दीपकओ को एक साथ बुझा दें तो अहिरावन का वध हो जाएगा औरसब ठीक हो जाएगा तब हनुमान जी पंचमुखी रूप धारण किया
उतर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पशचिम में गरुण मुख, आकाश की ओर हायग्रीव मुख और पूर्व में हनुमान मुख धरकर दीपकओ को एक साथ बुझाकर आहिरावन का वध दिया और राम और लक्षमण जी को बचाया तभी से उनका नाम पंचमुखी पडा

आशा करता हूँ आपको ये लेख जरुर पसंद आएगा अगर आपके पास भी कोई आर्टिकल हैं तो आप हमे Nagarajeetnagar@gmail.com पर मेल कर सकते हैं हम उसे आपके नाम के साथ नया सवेरा पे पब्लिश करेंगे. धन्यवाद दोस्तो

Comments