दोस्तो आज के दिन 15 अप्रेल 1469 को सिख धर्म के प्रथम गुरू, गुरू नानक देव जी का जन्म हुआ था इस सुअवसर पर हम आपको उनके प्रेरक विचारो से अवगत कराना चाहते हैं
गुरु ननाक जी के प्रेरक वचन
1. केवल वही वचन बोलो जो आपको सम्मान दे
2. ईशवर की सीमायें और हदे पूरी मानव जाति की कल्पना से परे हैं
3. बिना गुरू के कोई भवसागर पार नही कर सकता
4. जिन्द्गी में कभी ये ना सोचें की ये काम काम नामुमकिन है
5. जिन्होने प्रेम किया हैं वे वहीं हैं जिन्होने ईशवर को प्राप्त किया हैं
6. सभी मानव एक है ना कोई हिन्दू है ना मुस्लिम
7. भगवान के दरबार में सभी के कर्मो का हिसाव है
8.संसार पर विजय पाने के लिए अपनी कमियो और विचारो पर जीत पाना आवशक है
9.परमात्मा वह है जिसकी चमक से सब कुछ चमकीला है
10.ना तो में बच्चा हूँ ना जवान ना पुराना हूँ ना मै किसी जाति का हूँ
11.दुनिया में जब जब खुशी की कामना करते है दर्द सामने आजाता है क्योकी खुशिया बाटने से बढती है
12.परमात्मा की हजारो आंखे हैं फिर भी एक भी आंख नही है उनके हजारो रूप है फिर भी एक भी रूप नही है
13.कर्म की भूमि पर फल के लिए कर्म सबको करना पड़ता है परमात्मा तो लकीरे देता हैं उनमे रंग खुद भरना पड़ता है
14.अपने अस्तित्व के कुंज में शांति से रहो मौत के दूत तुम्हे छू भी नही पाएंगे
15.सत्य को जानना सबसे बडा हैं और उससे भी बडा है सच्चाई के साथ जीना
16. जिसे खुद पर विशवास ना हो वह कभी परमात्मा पर भरोसा नही कर सकता
17. दुनिया सपने में रचा एक नाटक हैं
18. मैने जन्म नही लिया हैं तो मेरे लिए कोई कैसे मर सकता है या जन्म ले सकता है
19. आपकी भक्ति ही मेरा मान है
20. परमात्मा एक है वह अनेक रूपो मे विध्मामान है
आशा करता हूँ आपको गुरू ननाक देव जी के विचार जरुर पसंद आएँगे अगर आपके पास हमारे लिए कोई सुझाव हैं तो आप हमे Nagarajeetnagar@gmail.com पर मेल कर सकते हैं अगर आपके पास कोई लेख हैं तो आप हमे भेज सकते हैं हम उसे आपके नाम के साथ नया सवेरा पे पब्लिश करेंगे धन्यवाद
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