दोस्तो आज हम आपको स्वेज नहर के बारे में जानकारी देंगे
निर्माण - स्वेज नहर जो की भूमध्य सागर और लाल सागर को आपस में जोडती हैं इस नहर को फ्रांस के इंजीनियर फडीनेन्ट ने 1858 में शुरू करवाया स्वेज नहर की लम्बाई 168 km तथा चौडाई 60 मीटर और गहराई 16.5 मिटर हैं यह 10 वर्षो में बनकर तैयार हुई सन 1869 में स्वेज नहर को परिवहन के लिए खोल दिया गया पहले जाहजो द्वारा इस नहर को पार करने का औषतन समय एक दिन था पर 1887 से इसे एक रात में पार किया जा सकता हैं
इस नहर पर अब मिस्र का कब्जा हैं
आकार में ये नहर पनामा नहर से दुगनी हैं पर इसको बनाने में पनामा के मुकाबले एक तिहाई खर्च हुआ
व्यापार - स्वेज नहर के माध्यम से फारस की खाडी के देशो से खनीज तेल और रसायनो का आयात किया जाता हैं तथा और एशियाई देशो से चाय कहवा रबर जूट मसाले अयस्क खाध्य सामिग्री लकडी, सूती कपडे आदि पश्चिमी युरोपीय देशो और उतरी अमेरिका को निर्यात किया जाता हैं
तथा बदले में इन देशो से मशिनरी रसायनिक पदरथ दवाईया और बिजली का सामान आदि आयात किया जाता हैं
स्वेज नहर की उपयोगिता - इस नहर से यूरोप से एशिया और पूर्वी अफ्रिका क रास्ता खोल गया और लगभग 6000 मील की बचत हो गई और अन्य देशो भारत, पकिस्तान, ईरान, अरब ईराक न्यूजीलेन्ड़ ओस्टेलिया आदि देशो से व्यापार बढ गया
जल मार्ग
स्वेज नहर में जलयान 12 से 15 किमी प्रति घंन्टे की गति से चलते है क्योकी की तेझ गति से चलने पर नहर के किनारे टूटने का डर बना रहता है। इस नहर को पार करने में औसतन 12 घंण्टे का समय लगता है इस नहर से एक साथ दो जलयान नही निकल हो सकतें है पर जब एक जलयान निकलता है तो दूसरे जलयान को गोदी में बाँध दिया जाता है इस तरह इस नहर से होकर एक दिन मे अधिक से अधिक 24 जलयानो का आबगामन हो सकता है।
स्वेज नहर बन जाने से यूरोप एवं पूर्व के देशो की मध्य की दूरी कम हो जाती हैं
लिवरपूल से मुम्बई आने में 7250 किमी और हांगकांग पहुँचने मे 4500 किमी
न्यूयार्क से मुंबई पहुँचने मे 4500 किमी की दूरी कम हो जाती है। इस नहर के कारण ही भारत तथा यूरोप के देशो के व्यापारिक सम्बन्ध अच्छे हुए है।
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