महावीर स्वामी जी की मार्गदर्शक कहानी

आप सभी को महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं.  इस पावन अवसर पर आज मैं आपके साथ भगवान् महावीर की एक बेहद प्रेरणादायक व रोचक कहानी साझा कर रहा हूँ
ग्वाले का हृदय परिवर्तन

एक समय की बात हैं महावीर स्वामी शाम के समय गाव में एक पेड के पास शान्त होकर ध्यान कर रहे थे तभी एक ग्वाला अपने पशुओ के साथ उनके पास आया और कहने लगा हे मुनि मैं गाव में दूध बेचने जा रहा हुँ आप मेरे पशुओ का तब तक ध्यान रखे जब तक मैं वापस ना आ जाउ यह कहकर वह बिना स्वामी जी का उत्तर सुने वहाँ से चला गया
जब वह वापस तो उसने देखा की स्वामी जी वही पर थे पर ग्वाले का पशुधन वहाँ पर नही था तो उसने महावीर जी से पूछा की मुनिशवर मेरे पशु कहाँ हैं स्वामी जी ने कोई उत्तर नही दिया तो वह ग्वाला पशुओ को ढूडने निकल गया सुभा तक पशु चरकर वापस आ गयें और महावीर स्वामी जी को घेरकर बैठ गयें जब ग्वाला वापस आया और उसने अपने पशुधन को स्वामी जी के पास बैठा देखा तो उसे क्रोध आ गया और वह कहने लगा की इस मुनि ने मेरे पशुओ को छिपा लिया था अब में इसकी खबर लूँगा और ग्वाले ने अपने शरीर पर बँधी रस्सी को खोल लिया और स्वामी जी पर बार करने लगा तभी वहाँ एक दिव्य आदमी प्रकट हुआ और ग्वाले से कहने लगा हे मूर्ख तुम ये क्या पाप कर रहे हो  तुम बिना मुनिशवर का उत्तर सुने यहाँ से चले गए और जब तुम्हे तुमारे पशु मिल गए तो भी खुश नही हो और इन्हे दोष दे रहे हो हे मूर्ख तुम जिन पर बार कर रहे हो ये भावी तीर्थकर हैं यह सुनकर ग्वाला स्वामी जी के पैरो में गिर गया और माफ़ी मागने लगा और वहाँ से चला गया
आशा करता हुँ आपको ये कहानी जरुर पसंद आएगी अगर आपके पास नही कोई लेख हैं तो आप हमे naagarajeetnagar@gmail.com पर मेल कर सकते हो हम उसे आपके नाम के साथ नया सवेरा पे पब्लिश करूँगा. धन्यवाद 

Comments